अब कहां बात उन गीतों में ?
जहां प्रेम रस बिखरता था।
उन गीतों को सुन सुनकर,
जोड़ो का प्यार संवरता था।
लुप्त हुई झंकार उन गीतों की,
जिनका कल महकता था।
उन गीतों के निकलते शोलों से,
हर जन का दिल मचलता था।
-चंद्र दत्त शर्मा