जीवन में कभी ऐसे क्षण आते
जब मानव दुविधा में फँस जाता
कुछ राह उसे दिखती ही नहीं
तन मन निराशा से भर जाता
कर्म से यदि विमुख नहीं होते
दिशा कर्म की सही रखते
लाभ, हानि, यश, अपयश जो
सही दिशा की ओर बढ़ जाते
जैसे अर्जुन महान धुरंधर थे
संबंधी को देख दुविधा में हुए
शस्त्र उन पर उठा ना सके
जब कृष्ण ने मार्गदर्शन किया
कर्तव्य पथ पर अग्रसर हुए
जब कभी सही पथ ना मिले
ए मानव ईश्वर का स्मरण कर
उनकी शरण में जाने पर मानव
उचित दिशा की ओर चल बढ़
बुद्धिमान विवेकशील प्राणी
परिस्थिति के वश में नहीं रहते
प्रभावी निर्णय लेकर वह मानव
किंकर्तव्यविमूढ़ता से दूर रहते
आत्मविश्वास यदि सुदृढ़ है
तो हर स्थिति से पार हो जाते
ऐसे आत्मविश्वासी प्राणी
जग में उजियारा फैलाते