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भारत-मन की बात

Omprakash Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलते चलते द्वारीका जाना सबके वश की बात नहीं है
        
                                                    
                            
चलते चलते वीष पी जाना सबके वश की बात नहीं है
गंगा जी का संग मिल जाना सबके वश की बात नहीं है
भारत भु में जन्म हां पाना सबके वश की बात नहीं है
मिले हैं चार धाम ,बारह ज्योतिर्लिंग संग अजमेर और पुष्कर इन सबके दर्शन पा जाना सबके वश की बात नहीं है
काश्मीर से कन्याकुमारी तक
सुर्यौदय के सुर्य द्वार से द्वारीका के
राजमहल तक संतुष्टि को पा जाना
सबके वश की बात नहीं है

दुनिया वालों ध्यान से सुनना
ध्यान से सुनना अंतर्मन के ज्ञान से सुनना
भारत भु का संग मिल जाना
संग मिल जाना सुख मिल जाना
छाछ दुध दही मिल जाना
सबके वश की बात नहीं है
सुना करके अंतरीक्ष को
सुनीता के गौरव को पाना
स्वागत में डाल्फीन का आना
सबके वश की बात नहीं हैं
तिरंगे को सम्मान दिलाना
सब के मन की बात यही है
भारत से नजरों को मिलाना
अब सबकी औकात नहीं है
एक वर्ष पहले
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