विज्ञापन

लोग पढ़ते हैं अब उदासी को

Nivedan Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी का सबब उदासी को
        
                                                    
                            
लोग कहते हैं अब उदासी को

बस हटा दीजिए ख़ुशी का नक़ाब
देख पाएँगे सब उदासी को

हम नहीं कह सके मगर इरफ़ान
तुमने पहना ग़ज़ब उदासी को

आइना जब उतार देता है
हम पहनते हैं तब उदासी को

दोस्त कल शाम फिर बुला लाए
बज़्म में बेसबब उदासी को

सोचता हूँ कि मुस्कुराने का
वक़्त मिलता है कब उदासी को

मेरे उस्ताद कह रहे थे कल
लोग पढ़ते हैं अब उदासी को

नम मिलेगी मिरी हर इक तस्वीर
हम उतारेंगे जब उदासी को
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all