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सामयिक दोहा

Nishant Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अयोग्य हाकिम ही यहाँ , बना ख़ुदा है आज।
        
                                                    
                            
बनकर राहु बैठ गया , आती कभी न लाज।।
-निशान्त शुक्ल
 
3 महीने पहले
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