विज्ञापन

बेवजह

Nisha Devi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर बार आंखों देखा
        
                                                    
                            
सच नहीं होता।
हर बार कानों सुना
सच नहीं होता।
हर बार कहा गया शब्द
सच नहीं होता।
लोग तो पल में फैसला
सुना देते हैं।
बेकसूर को कसूरवार
बना देते हैं।
बेवजह जीते जी कब्र में
दफन कर देते हैं।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamal jha

90 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10990 कविताएं

View Profile