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बेरहम ज़माना

Nisha Devi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बेरहम जमाने में किसी पर विश्वास करना
        
                                                    
                            
हराम हो गया है।
गाय की खाल में भेड़ियों का घूमना जो
सरेआम हो गया है।।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले
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