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ठिकाना

Niraj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भटकते फिरते आशियाना ढूंढ लेंगे
        
                                                    
                            
हम परिंदे अपना ठिकाना ढूंढ लेंगे

तुम्हे कब कहा है मेरे साथ चलना
हम अकेले ही खजाना ढूंढ लेंगे

ऐ समंदर तेरे थपेड़ों से है परेशान
गर तू साथ दे तो किनारा ढूंढ लेंगे।

 
2 वर्ष पहले
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