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खुले गगन के नीचे

Niraj Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुले गगन के नीचे जिनका बसर होता है
        
                                                    
                            
ऐसे परिंदो का कहाँ कोई घर होता है

हवाएँ तक बिकने लगती है जब बाज़ारो में
तब जाकर यहाँ कोई शहर, शहर होता है

मेरी हर कोशिश को बेकार समझने वालों
मंजिल से पहले हर शख़्स रहगुजर होता है ।
2 वर्ष पहले
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