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खुले गगन के नीचे

                
                                                         
                            खुले गगन के नीचे जिनका बसर होता है
                                                                 
                            
ऐसे परिंदो का कहाँ कोई घर होता है

हवाएँ तक बिकने लगती है जब बाज़ारो में
तब जाकर यहाँ कोई शहर, शहर होता है

मेरी हर कोशिश को बेकार समझने वालों
मंजिल से पहले हर शख़्स रहगुजर होता है ।
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2 वर्ष पहले

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