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प्रेम

Nipun yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब से फोटो छपी उसके रुखसार की।
        
                                                    
                            
कीमतें बढ़ गई तब से अखबार की।

जीत जाए अगर वो मेरे हारने से,
तो मनाऊं खुशी मैं मिरी हार की।

मुझको मिलती है वो सिर्फ स्कूल में,
कोई खा जाए छुट्टी ये इतवार की।

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6 वर्ष पहले
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