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मैं अकेली।

NIHALIKA K

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छोटी थी, नादान थी,
        
                                                    
                            
दुनिया से अनजान थी।
प्यार भरा दिल था मेरा,
हर कोई अपना था मेरा।
अंधेरे से जब घिरी,
आकर कुएँ में मैं गिरी।
साथ, प्यार, मदद की आस,
झूठ, फरेब, सब थे पास।
अकेली, तन्हा जब हुई,
लोगों की सच्चाई तब खुली।
जिंदगी बन गई एक पहेली,
राह में खड़ी थी बस मैं अकेली।
2 महीने पहले
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