कविता : चैन की नींद....
हर गली मोहल्ले में इश्क के
चर्चे होने लगे तुम्हारे मेरे
कहीं चलें भाग कर दूर....
हम दो प्रेमी सबेरे सबेरे
ताकि हम साथ
हंसे साथ रोएं
चैन की नींद
आराम से सोएं
चैन की नींद
आराम से सोएं.......