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प्यार की एक किश्ती को डूबते देखा।

Nema Ram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समाज रूपी सागर में
        
                                                    
                            
प्यार की, एक किश्ती को हमने डूबते देखा।
दिल की तन्हाइयों में हमने उन्हें खोते देखा।
प्यार के अनजाने सफर में कसमें,वादे,नेक
इरादे की किश्ती में उनको सवार होते देखा।
अरे उनको हमने
दर दर भटकते और घर से बेघर होते देखा।
नहीं अपनाया नहीं स्वीकारा जब समाज ने
तो डूब
किसी दरिया में हमने उनको जान देते देखा।
समाज रूपी सागर में
प्यार की, एक किश्ती को हमने डूबते देखा।
 
एक महीने पहले
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