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मंज़िल मिलने में एक बाकी है।

Nema Ram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मंज़िल मिलने में एक बाकी है।
        
                                                    
                            

राही तुझे
मंजिल की राह जो पाना है।
तो
जाग राही तुझे दूर जाना हैं।
होने वाला है अब सवेरा
और सवेरे
में बस एक पल और बाकी है।

तू जो चला है तो चलता रह
मंजिल भी अब आने वाली है।
और
अब शाम भी, ढलने वाली है।
और शाम ढलने
में बस एक पल और बाकी है।

तू अपनी उम्मीदें जिन्दा रख।
और हौंसले तू बरकरार रख।
मिलने वाली है अब मंज़िल
और मंज़िल मिलने में
बस, एक कदम और बाकी है।

कोशिशें जो तेरी जारी है।
मंजिल मिलने की बारी है।
अगर फिर भी न मिली है।
मंजिल तो, मिल जाएगी।
बस एक कोशिश और कर
क्योंकि उसमें
बस एक कोशिश और बाकी हैं।
 
एक महीने पहले
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