विज्ञापन

पुरुष...

Neha Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पुत्र श्रवण सा कभी,कभी तू है प्रह्लाद कि भाँति
        
                                                    
                            
कभी पिता का वचन निभाने राम कि छवि है आती
नचिकेता सा पुत्र भी है तू यमलोक लांघ कर आये
कभी भरत बन सिंह से खेले जग देख तुझे हर्षाये
❤
है कन्हैया कि मुरली तु सखियाँ जिनपर मोहित
गीता का उपदेश जो दे तू युद्ध भूमि में शोभित
एकलव्य सा अजेय धनुर्धर कर्ण महा तू दानी
धर्मराज सा न्याय करे तू विदुर का किधर है सानी
❤
एक हाथ रुद्राक्ष सुशोभित दूजे में शमशीर
जन्मा नहीं धरा पर कोई परशुराम सा वीर
सारी सृष्टि मांग ले तू बन जाये जो कभी वामण
कहाँ कोई प्रकांड धरा पर जैसा था वह रावण
❤
आर्यभट्ट सा ज्ञानी है तू,कुटिल बुद्धि कौटिल्य की
वीर शिवाजी की गाथा तू कथा महाराणा के शौर्य की
वीर कुँवर ना हारा कभी साक्षी है इसका इतिहास
मंगल,तात्या कभी नहीं रूका लिया नहीं सन्यास
❤
एक रवि नीले नभ पर है,एक दिनकर था वसुधा पर
दीन बंधु भगवान कहाये,एक दीन बंधु था यहाँ पर
गीतांजलि रविन्द्र लिख गये,पंत का कहीं ना जोर
निराला की कविता पढ़ता जग,विद्यापति कि पराती भोर
❤
संविधान जो बना गया तू सबसे बड़ा लिखित है
परीक्षार्थी परीक्षक से उत्तम है तेरे कागज पर अंकित है
मंदिर का परिभ्रमण कराये बाकि समय विद्यालय जाये
काशी के मंदिर में कभी बिस्मिल्लाह की शहनाई सुहाये
❤
आनंद बन शिक्षा बांटे तू,सचिन बन खेल दिखाये
अभिनय की अमिताभा तेरी उर मे नहीं समाये
नेता मिला तू मोदी रूप में लोकतंत्र का विश्वास
कभी ना टूटने पाये मानव जनता का तुझसे आस
❤
बस ना बनना कभी तू मानव हिरण्यकशिपु सा बाप
दशरथ से कभी भूल से न हो पुत्र हत्या का पाप
ना हरना बालि बनकर तू अपने बंधु के हक को
ना चौसर में द्रौपदी हारना,ना मारना किसी बक को
©Priyadarshini_Shandilya

 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all