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एक कविता मेरे प्रिय पिता के नाम

Neha Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बचपन में मैंने आपकी उँगली पकड़कर चलना सीखा।
        
                                                    
                            
आपके कंधों पर बैठकर पूरी दुनिया देखी।
आपका सपना था कि मैं कुछ बनकर दिखाऊँ।
मुझे आज भी वह दिन याद है,
जब आपसे मेरी आख़िरी मुलाकात हुई थी।
यह सच है कि आप आज मेरे पास नहीं हैं,
लेकिन मैं आपकी गहरी नींद में सोई हुई उस शांत छवि को आज भी नहीं भूल पाई हूँ।
प्रिय पिता जी,
तब से लेकर आज तक मैं स्वयं को बहुत अकेला और उदास महसूस करती हूँ।
अक्सर चुपचाप बैठकर यही सोचती रहती हूँ कि
आख़िर कब आपके सपनों को साकार कर पाऊँगी।
मेरा भी मन करता है कि मैं भी
दूसरी बेटियों की तरह अपने पिता से
अपने मन की हर बात साझा करूँ।
इसीलिए आपकी यादों को अपने हृदय में संजोए,
मैं आपकी तस्वीर के सामने बैठकर
आज भी आपसे अपनी सारी बातें कह लेती हूँ।
आप भले ही मेरी आँखों से ओझल हो गए हों,
लेकिन मेरे दिल में आप हमेशा जीवित रहेंगे।
आपकी सीख, आपका स्नेह और आपके सपने ही
मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।
2 महीने पहले
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