कुर्सी की महता पर लिखने को बताता है,
देखकर कुर्सी को एक विचार कौंध आता है ,
सामान्य कुर्सी पर तो हर कोई बैठ जाता है,
पर दफ्तर/ऑफिस में महत्व उसका बढ़ जाता हैं,
कुर्सी पर बैठ कर वो गीत सुनता है
कुर्सी पर ही बैठकर वह जिला/राज्य/देश चलता है
कुर्सी को देखकर वो मस्त हो जाता हैं
कुर्सी के ही खातिर वह भ्रष्ट हो जाता हैं
कुर्सी पर बैठना बड़ी बात नहीं है,
लेकिन उस कुर्सी को पा सकूं, इतनी औकात नहीं
कुर्सी पर लिखने को जब भी मन में आता है ,
उन लोगों के विचार कौंध जाता हैं ,
की जब तक ना मिले कुर्सी बड़ा विनम्र वह रहता है,
और कुर्सी पर जाते ही अपनी औकात भूल जाता हैं..।।