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आज बनाया एक दिन बिगड़ जाना है

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक दिन मोहब्बत में बिछड़ जाना है
        
                                                    
                            
एक डाल पर बैठे कल उड़ जाना है

ये मौसम की पतझड़ भी रुकती नहीं
आज कोपल तो कल फिर झड़ जान है

खिले हुए है आज जो गुल ए चमन
एक रोज बाग़ ए चमन उजड़ जाना है

ये बनाया है खेल,तेरे किस काम का
आज बनाया एक दिन बिगड़ जाना है

ये जिंदगी की दौड़ बड़ी बेवफा है
कभी आगे तो कभी पिछड़ जाना है
-नीटू मावी
एक घंटा पहले
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