एक दिन मोहब्बत में बिछड़ जाना है
एक डाल पर बैठे कल उड़ जाना है
ये मौसम की पतझड़ भी रुकती नहीं
आज कोपल तो कल फिर झड़ जान है
खिले हुए है आज जो गुल ए चमन
एक रोज बाग़ ए चमन उजड़ जाना है
ये बनाया है खेल,तेरे किस काम का
आज बनाया एक दिन बिगड़ जाना है
ये जिंदगी की दौड़ बड़ी बेवफा है
कभी आगे तो कभी पिछड़ जाना है
-नीटू मावी
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