फिर कभी तुझे देखा नहीं जाने के बाद
न जाने फिर कब आओगे ज़माने के बाद
तेरी जुदाई ने कुछ इस तरह से तोड़ा मुझे
अब तो चेहरा भी नहीं खिलता सजाने के बाद
तुम्हारे गायब होने से कुछ ऐसा माहौल था
जैसे चिता पर कोई लौटा नहीं जलाने के बाद
चाहत ना थी कुछ पाने की तुम्हारे सिवा
कुछ मैने मांगा भी नहीं तुम्हे गंवाने के बाद
तुम्हे चुना तुम ही बिछड़ गए,वक्त की बात है
मेरा तीर कभी चूका नहीं निशाने के बाद
-नीटू मावी