मार्का - ए- तशहीर मे 'जवाहर' की लड़ी है।
कल थी सियासी पार्टी आज तो चौकड़ी है।
शोर है कि कुछ जल रहा किसी चिंगारी से,
पता तो करो वो संविधान है या फुलझड़ी है।
बांगलादेश,'अरब स्प्रिंग'या फिर रेजीम चेंज,
देश की सड़कों पर उन्माद की कीलें गड़ी है l
कभी गाली, कभी धमकी,कभी है मुहोब्बत,
जम्हूरियत भी किस मोड पर आकर खड़ी है।
कुछ पार्टीयों की सीमा सिकुड़ रही लगातार,
और कुछ पार्टीयां परिसीमन के पीछे पड़ी है।
- जयंत दिक्षित