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इंसानियत पर हावी वोट

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                            इंसानियत पर हावी वोट
        
                                                    
                            

दिन था सोमवार का,
तारीख थी 10 जून 2019,
स्थान, पश्चिम बंगाल के
टेंगरा इलाके का
एनआरएस मेडिकल कॉलेज।
75 वर्षीय मोहम्मद सईद,
पड़ा था दिल का दौरा,
हुए थे अस्पताल में दाखिल।
थे परिजन उनके साथ ही,
पड़ा उनको दिल का दौरा दूसरा,
बजे थे रात के ग्यारह।
ड्यूटी पर थे जूनियर डॉक्टर,
परिवाह मुखर्जी और यश टेकवानी,
लगाया उन्होंने जीवन रक्षक इंजेक्शन।
डॉक्टरों ने कोशिश की भरपूर,
पर बच न सकी उस मरीज की जान।
लगाया परिजनों और पड़ोसियों ने,
गलत दवाई देने का आरोप।
परिजनों ने किया फोन,
बुलाए अपने इलाके से लोग,
किया हंगामा।
आए दो ट्रकों में असंख्य लोग भरकर,
की उन डॉक्टरों की पिटाई भयंकर।
ईंट की चोट से
डॉक्टर मुखर्जी के सर में हुआ फ्रैक्चर।
किया उन्हें भर्ती निजी नर्सिंग होम में,
हुआ उनका ऑपरेशन,
इस घटना का हुआ जबरदस्त विरोध,
इमरजेंसी सहित तमाम सेवाएँ
की ठप्प।
इस अस्पताल का गेट भी
डॉक्टरों ने किया बंद।
फैलती खबर के साथ
पश्चिम बंगाल के दूसरे
मेडिकल कॉलेजों में
भी शुरू हो गया आंदोलन ।
होने लगी झड़प मरीजों और डॉक्टरों में,
परेशान होते रहे उनके परिजन।
इन झड़पों में चार डॉक्टर
भी हो गए घायल।
ज्यादातर सरकारी डॉक्टर हुए
इस आंदोलन में शामिल।
पहले से थी ही बदहाल
स्वास्थ्य योजनाएँ,
हो गई अब बिल्कुल चौपट।

मुफ्त इलाज के लिए अनेकों
जिलों से,पश्चिम बंगाल के,
पहुँचा करते थे मरीज़ हजारों।
इन बाहर से आते मरीज़ों को,
सामना करना पड़ रहा है,
इन दिनों अनेकों दिक़्कतें।

अस्पताल परिसर में ही
रात गुज़ार रहे हैं,
अनेकों मरीज़ और उनके परिजन!
बुधवार (12ता.) से अलग-अलग
अस्पतालों में
जा रही है लोगों की जान!
अनगिनत मरीज़ इलाज के लिए
एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल
लगा रहे हैं दौड़!
राजनीतिज्ञ अपनी सेक रहे
हैं रोटियाँ,
इन मरीजों का कहीं नहीं है ठौर।
एनआरएस मेडिकल कॉलेज में
पहुँचकर कहा था सीएम ममता ने,
डॉक्टर खत्म करें तुरंत हड़ताल।
लौटें काम पर, नहीं तो होगी
कड़ी कार्रवाई, डॉक्टर
होंगे खुद जिम्मेदार।
इस बयान पर ममता के,
हुआ पश्चिम बंगाल जूनियर
फोरम नाराज़…..
रखी उन्होंने ममता के
सामने शर्ते पूरी छह…

1. डॉक्टरों को लेकर दिए बयान
पर तुरंत माफी माँगे ममता।
2. जारी करें एक बयान,
जिसमें डॉक्टरों पर हुए हमले
की हो निंदा।
3. पुलिस की निष्क्रियता की
तुरंत कराए जाँच।
4. हो कार्यवाही डॉक्टरों पर
हमला करने वालों के खिलाफ।
5. लिया जाए वापस जूनियर डॉक्टरों
और मेडिकल छात्रों पर लगा
झूठा आरोप।
6. अस्पताल परिसर में हो
सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात।

बंगाल में गृह और स्वास्थ्य विभाग का
प्रभार है ममता के पास।
पर रवैया है अड़ियल ममता का,
कर रही भाजपा और माकपा के
साज़िश की बात।
के एन त्रिपाठी ,राज्यपाल से हो रही
हस्तक्षेप की माँग।
कहते हैं भाजपा नेता मुकुल राय,
होना चाहिए संवैधानिक शक्तियों
का प्रयोग।
कहा प्रदेश बीजेपी महासचिव
स्वयं तन मजूमदार ने…..
तीन दिनों से हैं स्वास्थ्य सेवाएँ ठप्प।
पर राज्य सरकार ने उठाया नहीं
ठोस कदम।
कहा तृणमूल कांग्रेस महासचिव
पार्थ चटर्जी ने …..
इस मामले को लेकर है
सरकार गंभीर ।
किए गए हैं पाँच लोग गिरफ्तार।

आंदोलन खत्म करने के हो रहे हैं प्रयास।
स्वास्थ्य सचिव समेत तमाम अधिकारी,
कर रहे हैं हड़ताली डॉक्टरों से बात।
मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने कहा,
मुख्यमंत्री ममता कर रही हैं निगरानी,
दिया गया है जरूरी दिशा-निर्देश।
कहा इस महानगर के एक इंटर्न
डॉक्टर अनिकेत ने…
जब तक नहीं मिलेगी सुरक्षा,
शुरू ना होगा काम।

आंदोलनकारियों के रवैये से
और इन्हें मिलते राज्यव्यापी
समर्थन से यह बात है साफ।
गतिरोध टूटने के फिलहाल
कम ही हैं आसार।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का कथन…..
धमका रही है डॉक्टरों को
ममता सरकार।
अब तक पश्चिम बंगाल में
300 डॉक्टर दे चुके हैं इस्तीफा।
दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्य प्रदेश,
और बिहार के डॉक्टरों का
भी मिलने लगा है समर्थन।
आईएमए ने 17 जून को
किया है देशभर में हड़ताल
का आवाहन।
एम्स के डॉक्टरों ने भी दिया है
ममता को अल्टीमेटम।
देख कर बढ़ता आक्रोश,
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंत्री ने
की है अपील,
जारी रखें डॉक्टर काम अपना,
बस करें प्रतीकात्मक आंदोलन।
पश्चिम बंगाल से शुरू हुआ
डॉक्टरों आंदोलन
अब ले चुका है देशव्यापी मोड़ ।
राजस्थान के जयपुरिया अस्पताल में
डॉक्टरों ने हाथ में बांधी काली पट्टी
और किया काम।
हैदराबाद के निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ
मेडिकल साइंसेज ने भी
निकाला विरोध में मार्च।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के
रेजीडेंट डॉक्टरों ने
वी वांट जस्टिस के लगाए नारे।
केरल के भारतीय चिकित्सा संघ
के डॉक्टरों ने भी
जताया है भारी विरोध।
नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज
में हो रहा है प्रदर्शन,
दिल्ली के डॉक्टर भी कर रहे हैं
इसका पुरजोर विरोध।

इन बातों पर है अड़ियल
रवैया ममता का,
दे रही इसे राजनीतिक रंग।
बता रही है इसे ,
कर रहे हैं भाजपा और
माकपा साज़िश एक संग।
दे रही हैं सारी राजनीतिक पार्टियाँ
इस आंदोलन को अजीबो रंग,
हो रहे हैं प्रहार।
झमेले में पड़ी है
गरीब और मजबूर मरीज़ों
की जिंदगियाँ,
है नहीं किसी को सरोकार।
आई है खबर आज,
हो चुकी है फॉर्मल अनाउंसमेंट,
होने वाला है खत्म आंदोलन।

एक अस्पताल में एक मरीज़ की मौत,
बदल चुकी है अब सैकड़ों मौतों में।
सिर्फ कुछ लोगों की असहिष्णुता,
ले चुकी है अब इतनी करवटें।
छोड़ गई है सवाल हमारे लिए,
इन सब से क्या जीती इंसानियत,
या जीत गया डॉक्टरों का आत्म सम्मान?
या फिर जीते राजनीतिज्ञ या
उनके खोखले बयान।
सत्ताधारियों को बचानी है कुर्सी अपनी,
जनता का नहीं है इन्हें ध्यान।
जज्बात हो चुके हैं पत्थर इनके,
कैसे बचाएँ वोट बैंक अपना,
बस यही है इनका दीन ईमान।

नीना सिन्हा।  


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