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उम्मीद से मेरी बहस हो गई।

Neelam Chourasia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्मीद से मेरी बहस हो गई।
        
                                                    
                            
मैंने कहा, "तुम धोखेबाज़ हो।"
उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
"इतना किया ही मत करो।"
तब मैंने कहा,
"क्या मैं उम्मीद से भी उम्मीद न करूँ, तो कहाँ जाऊँ?"
उसने उत्तर दिया,
"विश्वास के पास जाओ।"
जब मैं विश्वास के पास गया,
तो विश्वास धोखे का दोस्त निकला।
तब मैंने कहा,
"विश्वास, मैं तुम्हारे पास बहुत विश्वास के साथ आई हूँ। तुमने भी मेरे साथ धोखा किया। अब मैं कहाँ जाऊँ?"
उसने कहा,
"आस्था के पास जाओ।"
आस्था बोली,
"न मैं तुम्हारी उम्मीद तोडूंगी,
न मैं तुम्हारा विश्वास तोड़ूँगी।
बस तुम्हारे ही साथ रहूँगी,
तुम्हारी रक्षा करूँगी।
बस तुम्हें मेरा साथ नहीं छोड़ना है।"
3 महीने पहले
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