विज्ञापन

तुम ग़ज़ल बन गई

Neelam Chourasia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम ग़ज़ल बन गई
        
                                                    
                            
रात में जब जुगनू देखा,
तो तुम्हारी याद आई,
उसकी रोशनी में
तुम्हारी मुस्कान नज़र आई।
जब तुम आईं,
तो किसी की कही हुई बात याद आई,
फिर न जाने क्यों
हर बात तुम्हीं तक आ गई।
समय ने यूँ करवट बदली,
कि इंतज़ार मेरी नज़्म बन गया,
तुम मेरी ग़ज़ल बन गईं,
और मेरा दिल तुम्हारा अल्फ़ाज़ बन गया।
अब साथ हो तुम दोनों
मेरी ज़िंदगी में,
तो मेरी हर कविता
एक मुकम्मल ग़ज़ल बन गई।
-नीलम चौरसिया “नील”
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile