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मुझे थोड़ा-सा आकाश चाहिए

Neelam Chourasia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझे थोड़ा-सा आकाश चाहिए
        
                                                    
                            

मुझे थोड़ा-सा विकास करने के लिए,
मुझे थोड़ा-सा आकाश चाहिए।
चाहत है कि पूरा आकाश ले लूँ,
पर मैं अगर पूरा ले लूँ, तो
आधा कुछ न बचेगा।
न प्यार बचेगा,
न आधा यार बचेगा।
आधा-अधूरा ही सब पूरा लगता है,
प्रेम आधा है सबके जीवन में,
क्योंकि आकाश आधा है।
क्योंकि वो धरती से दूर है, पर
धरती के हर पल पास है।
उसकी धड़कनों में,
उसकी साँसों में,
उसके कल में,
उसके आज में,
उसके परसों में,
उसकी रात में,
उसकी शाम में।
जैसे तुममें मैं पूरा हूँ,
मेरे में तुम पूरी हो।
-नीलम चौरसिया “नील”
एक महीने पहले
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