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बरोजगारी

Naziya Perween

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ी कमबख्त है ये बेरोजगारी,
        
                                                    
                            
ना पूछो इसकी लाचारी।
ना जाने कितने धक्के खाते है सड़कों में,
ना चलती कोई भी होशियारी।
एक नौकरी के चक्कर मे,
पढ़ डाली किताबे सारी।
ना जाने कितनी डीग्रियां हासिल की,
सोचा था मिल जाएगी नौकरी सरकारी।
मगर जब आँख खुली तो हर ओर थी बेगारी।
यहां जो चपरासी भी बनना हो तो,
पार करनी होगी एस.एस.सी. की हर पारी।
और देशों को चलाने के लिए,
बस चाहिए अदाकारी।
ना पढ़ना लिखना है इसमे,
वादे करनी है बहुत सारी।
ये क्या बात है बोलो,
क्या करते हो तुम वफादारी।
जहां चपरासी भी एस.एस.सी की इम्तिहान देता है,
वहां तुमनें बिना डिग्री के दे दी देश की जिम्मेदारी ।
यही तो एक वजह है डीग्रियां सड रहीं है तख्तों में,
और देश मे इस कदर बढ़ रहे हैं भ्रस्टाचारी।
की अब भी वक्त है सम्भलो तुम दिखलाओ समझदारी।
की इस मिट्टी में जन्मे हो तुम करो इसकी पहरेदारी।
तभी तो उज्ज्वल होगा भविष्य तेरा,
ना चलेगी किसी की मक्कारी।

नाजिया खुर्शीद

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4 वर्ष पहले
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