गर किसी शख़्स को जीवनमें ख़ास मख़सूस और विशिष्ट होना ही ज़रूरी है
तो उसका बा-अख्लाक़ शाइस्ता सभ्य शालीन और शिष्ट होना भी ज़रूरी है
-एन आर कस्वाँ