मुलाक़ातें जब-जब हद से ज्यादा बढ़ने लगीं तो रंजो-ग़म मिलने लगे!
अपने सुकूने-क़ल्ब के वास्ते आज-कल हम लोगों से कम मिलने लगे!
-एन आर कस्वाँ