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शबे-हिज़्र

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फ़िराक़ो-फुर्क़त में हयात गुज़र गई सारी
        
                                                    
                            
दिन बेचैन रातें तारे गिन गिन कर गुजारी
इक आँसू टपका जब भीगी आँख हमारी
शबेहिज़्र में भूले सारी हम कौकब शुमारी
-एन आर कस्वाँ
2 महीने पहले
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