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सजा ही काफ़ी नहीं

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उन से कह दो कि कोई और सबूत लेके आएं
        
                                                    
                            
कानों से सुनी आंखों से देखी निगाह ही कफ़ी नहीं !
इक बेगुनाह को बचाना कहीं ज्यादा ज़रूरी है
गुनहगार को उसके गुनाहों की सजा ही काफ़ी नहीं !

डॉ एन आर कस्वाँ
2 महीने पहले
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