विज्ञापन

रोशनाई

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिनमें आफ्ताब रात को महताब तन्हा है
        
                                                    
                            
रोजो-शब को दोनों ने रोशन कर रखा है!
रोशनाई जग में किरदारों की चमक से है
बे-सबब बे-मकसद भीड़ में क्या रखा है!
-एन. आर. कस्वाँ
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjai kumar

103 कविताएं

View Profile