दिनमें आफ्ताब रात को महताब तन्हा है
रोजो-शब को दोनों ने रोशन कर रखा है!
रोशनाई जग में किरदारों की चमक से है
बे-सबब बे-मकसद भीड़ में क्या रखा है!
-एन. आर. कस्वाँ