वक़्त-ए-जदीद में राम जैसा क़द होना ज़रूरी है
गोया इस दौर के रावण का वध होना ज़रूरी है!
हर-सू हर-सम्त ख़बीस हावी हो रहे हैं लोगों पर
क्या और ज़्यादा इन्सान की भद होना ज़रूरी है!
-एन. आर. कस्वाँ