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मुसाफ़िरत

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ूबसूरत मुसाफ़िरत है हयात गर बाहर निकलना आ जाए
        
                                                    
                            
खुद से अच्छा हम-सफ़र नहीं कोई अगर चलना आ जाए!
सूरते- हाल जो भी हो वक़्त जैसा भी हो झुका नहीं सकता
इन्सान को अपने हालात-ए -हयात में गर ढलना आ जाए!
-एन. आर. कस्वाँ
8 घंटे पहले
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