सुकून-ए -क़ल्ब केलिए लफ़्ज ए खुशी नाकाफ़ी है
मायूसी ज़ाहिर करने को लफ़्ज ए उदासी काफ़ी है
मेरे लफ़्जों से न किसीको ठेस लगे मग़र लगे कभी
मरहम का काम करे लबों पे मेरे लफ़्जे मु'आफ़ी है
-एन आर कस्वाँ