अजब ये खुमार कैसा हम सब पर तारी है
अंदर बिखराव बाहर संवरने की खुमारी है!
संवर जाए अंदर से अगर कहीं कोई 'बशर'
वो एक अकेला बाहर की भीड़ पर भारी है!