नेकी और रिफ़ाह-ए-ख़ल्क़ एक दानी की पहचान होता है
दान लेनेवाला महान नहीं होता दान देनेवाला महान होता है!
फ़ालतू और बेशी में से दिया गया दान कोई दान नहीं होता
खुद तंगीमें रहकर भी दियागया दान ही असल दान होता है!
-एन. आर. कस्वाँ