विज्ञापन

ऐसे-वैसे नहीं

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पता नहीं क्यूँ कहाँ कब कैसे हो गए
        
                                                    
                            
हम ऐसे तो न थे अब जैसे हो गए !
जैसे भी हैं फिर भी ऐसे -वैसे नहीं हैं
बे - सबब तो नहीं हम ऐसे हो गए !
-एन आर कस्वाँ
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12479 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile

Dr Preeti

44 कविताएं

View Profile