इम्तिहान चाहिए
ले लीजिए
ज़बाब प्रश्नों के
ले लीजिए
मिले सुकून जिसमें
परीक्षा भी वही
चाहो जैसे
करा लीजिए
शंका
जो मन में उठी
तमन्ना
जो दिल में जगी
वहम अधूरे
मिटा लीजिए
कष्ट मत दो
शरीर ढह जाएगा
रखा संभाल कर
बाढ़ में इक दिन
बह जाएगा
जलते हो
किस बात पर
डरते हो
किस बात पर
कुछ ज्यादा
चला गया
ले लीजिए
महल गाड़ी
हीरा जवाहरत
सब लीजिए
आंगन घर का
बांट लीजिए
फिर भी
मन भरा नहीं
हवाले
छोड़ चला जाता हूं
पर ईमान कहां
ममता कहां
रिश्तों की
परवाह कहां
सब खो जाएगा
रोना
इक दिन आएगा
महसूस
जब अकेला करोगे
पास
नहीं किसी को पाओगे
आंसू सूख चुके
अपने बिछड़ चुके
ना पास ना दूर कहीं
वीरान वस्ती में
अकेले तुम्हीं
सहारा
कोई नहीं
किनारा
कहीं नहीं
दर्द से कराहते
कोने में
पड़े कहीं
आत्मा
छोड़ती नहीं
प्राण
निकलते नहीं
तमन्ना
जीने की
अब और नहीं