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खत जो मैंने लिखा

NAND KISHOR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खत जो मैंने लिखा
        
                                                    
                            
शायद ये तुझपे लिखा
तेरी हर इक बात
तेरी हर इक मुलाकात
शब्दों में पन्नों पे उकेरा
रहता जो हर वक्त पहरा
मुलाकात जब से हुई
खता तुझसे जो हुई
तेरी हर वो बात
जिसमें छिपा कोई राज
पास होने से दूर तक
आंसू खुशी से गमों तक
जिसने झकझोर दिया
दिल को जिसने तोड़ दिया
सपने जो साथ देखे
तारों के बीच खोजे
चांद की चांदनी में
हंसते हुए रोते
माला जो पिरोयी थी
मोती खो गए
कसम साथ रहने की
यूं ही भूल गए
मैं कौन आप कौन
जानते नहीं
थे मिले कब
वो याद ही नहीं
राहों की मुलाकात
जन्मों का साथ
वादे जो किए
पूरे ना हुए
नदी का किनारा
सागर की लहरें
पर्वत की चोटी
थाली की रोटी
नाव की सवारी
महल वो अटारी
सिनेमा जो देखा
धर्मेंद्र की रेखा
आखिर मिला जो
मजेदार धोखा
कभी रोका नहीं
कभी टोका नहीं
इजाजत बिना
छुआ भी नहीं
गीत जो गाए
सावन मन भाए
बरगद की छाया
थे जब मुस्कराए
नैनों ने देखा
दिल ने जो बोला
मन की अभिलाषा
पूरी हुई आशा
पर बदला समय
नहीं कोई भय
टूटी कहानी
छूटी निशानी
बदला जैसे
शर्ट कोई पुरानी
हुआ जो अच्छा रहा
रिश्ता बचा रहा
तन से जुदा
मन से एक
जहां में अकेले
बांकी सब फेक
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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