खत जो मैंने लिखा
शायद ये तुझपे लिखा
तेरी हर इक बात
तेरी हर इक मुलाकात
शब्दों में पन्नों पे उकेरा
रहता जो हर वक्त पहरा
मुलाकात जब से हुई
खता तुझसे जो हुई
तेरी हर वो बात
जिसमें छिपा कोई राज
पास होने से दूर तक
आंसू खुशी से गमों तक
जिसने झकझोर दिया
दिल को जिसने तोड़ दिया
सपने जो साथ देखे
तारों के बीच खोजे
चांद की चांदनी में
हंसते हुए रोते
माला जो पिरोयी थी
मोती खो गए
कसम साथ रहने की
यूं ही भूल गए
मैं कौन आप कौन
जानते नहीं
थे मिले कब
वो याद ही नहीं
राहों की मुलाकात
जन्मों का साथ
वादे जो किए
पूरे ना हुए
नदी का किनारा
सागर की लहरें
पर्वत की चोटी
थाली की रोटी
नाव की सवारी
महल वो अटारी
सिनेमा जो देखा
धर्मेंद्र की रेखा
आखिर मिला जो
मजेदार धोखा
कभी रोका नहीं
कभी टोका नहीं
इजाजत बिना
छुआ भी नहीं
गीत जो गाए
सावन मन भाए
बरगद की छाया
थे जब मुस्कराए
नैनों ने देखा
दिल ने जो बोला
मन की अभिलाषा
पूरी हुई आशा
पर बदला समय
नहीं कोई भय
टूटी कहानी
छूटी निशानी
बदला जैसे
शर्ट कोई पुरानी
हुआ जो अच्छा रहा
रिश्ता बचा रहा
तन से जुदा
मन से एक
जहां में अकेले
बांकी सब फेक