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वर्षा के बादल

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरती तप रही सूर्य के प्रचंड प्रहार से
        
                                                    
                            
अब तो स्थिति बहुत चिन्ताजनक है
पृथ्वी के नदियां, बांध, तालाब, कुआं इत्यादि
सभी पानी के सभी स्त्रोत सूख गये हैं
अब आश्रित हैं भूमिगत जल स्त्रोतों पर
पाताल तक पहुंच बोर का पानी का स्तर
महानगरों में पानी की व्यवस्था चरमरा गई
नल की ये हालत है कि पानी आ गई तो आ गई
यदि नल दस- पद्र॔ह खुल गया बहुत है
सबको पीने का पानी मिल गया तो बहुत है
कोई भी मंत्री ,मुख्य मंत्री कितना भी हो पावरफुल
कहां से लायेगा पानी ?
सब बड़े- बड़े नेतागणों की हो गया पावर गुल
तत्कालिक व्यवस्था टैंकर से पानी पहुंचाना है
सिर्फ भूमिगत जल स्रोत सहारा है
जब तक हो पानी ,घर-घर पहुंचाना है
अब तो आकाश ही ताकना है
कहां हो छुपे हो वर्षा के बादल ?
अब तो आपका सहारा है
अब तक बहुत देर किया है आते-आते
अब तो जम के बरसो गाते- गाते
2 महीने पहले
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