विनयशील, संस्कारी, और नमित बने रहो
ये सब गुण आपको आकाश की ओर
बहुत ऊंचाई तक ले जायेगीं आकाश की ओर
नमित रहना बहुत कठिन और संघर्षमयी है
क्योंकि भी मानव को झुकना पंसद नहीं
स्वभाव के विपरित जाना एक कठीन तप है
जिसमें संघर्षशीलता से ही वह कर सकता है
जिसमें संकल्प शक्ति है नमन कर सकता है
योग और ध्यान आपको जीना सीखा सकता है
यह क्रियायें आपको विनयशील और नमित बना सकता है