मुझे कुछ कहना है, पहले अपने बारे में
मैं खुदगर्ज , डरपोक, आंखों सामने में
विरोध क्यों नहीं करता?
बौना पड़ जाता हूं सबके सामने में
साथ तो साथ कोई बात तक नहीं करता?
एक चना भांण क्या फोड़ सकता है?
एकजूटता चाहिए समाज में
होने वाले गलत काम के लिए
मेरे साथ- साथ क्या सब डरपोक हैं ?
यदि समाज को सुधारना तो
पहले अपने को सुधारो
फिर परिवार को सुधारो
फिर समाज को सुधारो
पहले संगठन, बाद में आन्दोलन
जितनी मजबूत होगी नींव
उतना मजबूत होगा संगठन
और भी मजबूत होगा आन्दोलन
जो मुझे कहना था कह दिया
जो आपको करना है कीजिए