मुझे चलने दो, मत रोको
जब तक मेरी सांस चल रही है
जब तक मेरी आस जग रही है
मुझे चलने दो, मत रोको
जर- जर काया में हृदय का स्पंदन बाकी है
अविरल गति से डगमगाते कदमों से
मुझे चलने दो, मत रोको
मन मजबूत है, संकल्प अडिग है
तो मुझे चलने से कौन रोक सकता है
समय कदापि नहीं, दुनिया कदापि नहीं
मौसम कदापि नहीं, भूकंप कदापि नहीं
मै तो परमात्मा से संलग्न आत्मा हूं
ईश्वर के व्दारा भेजा गया शांतिदूत हूं
विश्व के हर कोनों पर शांति चाहता हूं
मेरे प्राण त्यागते तक मत रोको
मुझे चलने दो, मत रोको