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झर -झर गिरता पानी

Naik prasad

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                            सावन का झर-झर गिरता पानी
        
                                                    
                            
न थम रही है बादल का गर्जना
न थम रही है बिजली का चमकना
न थम रही है पानी का गिरना
धरती का आंचल भर गया है पानी से
गरीब की कुटिया हो गई है पानी- पानी
कच्चे मिट्टी के मकान धसकने लगे हैं
पक्के मकानों के छत रिसने लगें हैं
ग्रीष्म ॠतु की विपदा पानी न मिलने की थी
सावन में पानी ही पानी ही चहुंओर
जंगल में खुशी-खुशी नाच रहा है मोर
यही तो दुनिया का असली गम
कहीं खुशी और कहीं गम
ऐसे सुहावना मौसम में कोई पिये गम
और कोई पिये रम
सावन में बरस रहा है पानी झम- झम
किसी के चेहरे चढ़ रहा पानी
किसी के चेहरे उतर रहा पानी
सावन का झर- झर गिरता पानी
2 महीने पहले
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