आशा एकमात्र जीने का सहारा है
जब जिन्दगी में चारो ओर निराशा छा जाये
अपना सिर आसमान की ओर ताकना है
असीमित नीला आकाश ,वर्ष के बारह महिने
किसी नकिसी मुसीबत में घिरा रहता है
पर कभी निराश देखा है क्या ?
प्रातःकाल सूरज की प्रतिक्षा करता रहता है
सूरज निकलते ही लालिमा लिए इतराती है
पर सूरज मध्यम-मध्यम प्रखर तेजी बढ़ती जाती है
क्या आसमान आपको कोई सिका-गिलवा दिखाती है क्या?
वर्षा ॠतु में हमेशा गिली रहती है आसमान
कोई शिकायत की है आसमान
रात्रि मे आसमान में चांद- तारे छा जाते हैं
असीमित आसमान सूरज, चंदा, तारे ,
पक्षी, पवन सभी स्वछंद उडान भरते हैं
निराशा कभी भी हो तो आसमान को देखो
और नई उमंग के साथ आसमान की ओर देखो
जीवन की लक्ष्य की ओर बढते चलो
बढते चलो और मंजिल कीओर देखते चलो
- डाॅ भागवत प्रसाद नायक