विज्ञापन

मानसून

NAGMANI KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उमस गर्मी परे
        
                                                    
                            
सबको रहता इंतेजार
केरल के तट पर
आता बादल झुमकर।
धीरे धीरे आगे बढता
नदी नालों को भरते जाता
खेत खलिहानों को सिंचते जाता
सरकार की पोल खोलते जाता।
कभी गरजता, कभी बरसता,
कभी चमकता, कभी ठहरता,
किसानों को खुश करते
पूरे देश में घूमता।
खेत में हरियाली लाता,
सावन का बाहर लाता,
बाबा का प्रसाद लाता,
प्रकृति के लिए राहत लाता
नदी उफनती, सड़क टूटती
ठनक गिरती, गाडी फिसलती
चार महीने अपना करतब दिखाती
वापस अपनें घर को जाती।
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kahar

5 कविताएं

View Profile

Shailja Jha

232 कविताएं

View Profile