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मानसून

                
                                                         
                            उमस गर्मी परे
                                                                 
                            
सबको रहता इंतेजार
केरल के तट पर
आता बादल झुमकर।
धीरे धीरे आगे बढता
नदी नालों को भरते जाता
खेत खलिहानों को सिंचते जाता
सरकार की पोल खोलते जाता।
कभी गरजता, कभी बरसता,
कभी चमकता, कभी ठहरता,
किसानों को खुश करते
पूरे देश में घूमता।
खेत में हरियाली लाता,
सावन का बाहर लाता,
बाबा का प्रसाद लाता,
प्रकृति के लिए राहत लाता
नदी उफनती, सड़क टूटती
ठनक गिरती, गाडी फिसलती
चार महीने अपना करतब दिखाती
वापस अपनें घर को जाती।
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