विज्ञापन

हंसी खुशी से भाई बहन हैं रक्षाबंधन मनाना

N manglam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भैया न भूलाना रक्षा बंधन हैं आ जाना
        
                                                    
                            
घर आंगन खेले बचपन को है याद रखना
प्यार रंगे धागे रक्षा बंधन है। मनाना
भाई बहन संग प्रेम बंधन हैं हमें निभाना
कलाई पर बांधा प्यार एहसास हैं। जाना
धागों की रीति-रिवाज प्यार हैं रक्षाबंधन
रिश्तों की डोर नीरज लिखते हैं। नजराना
बहन भाई की संग यादें हैं। बसी आ जाना
राखी एक धागा न कहना हैं। उम्र मेरी लगाना
तेरे मेरे बचपन के खेल आज बना हैं। सपना
रक्षाबंधन सच बहन को न भुलाएं हैं।भाई अपना
मन रिश्तों की डोर भाई कलाई पर तेरे है सजाना
आरती वंदन बहन भाई मीठा हैं। हमें खिलाना
हंसी खुशी से भाई बहन हैं रक्षाबंधन मनाना
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile