हम और हमारी सोच ही जीवन है।
इंसान के साथ और हमारी सोच है।
जन्म संग हम और हमारी सोच है।
युवा बने हम और हमारी सोच है।
मतदाता और हम हमारी सोच है।
नीरज लिखते हम और हमारी सोच है।
सबकी जीवन और जिंदगी समाज है।
हम और हमारी सोच हर परिवार हैं।
समाजिक रुप में हम सब इंसान हैं।
संसारिक रंगमंच पर किरदार निभाते हैं।
बस यही हम और हमारी सोच होती हैं।
सच क्षणभंगुर हम और हमारी सोच है।
हां सब-कुछ यही हमें छोड़कर जाना हैं।
शब्दों के साथ हम और हमारी सोच हैं।
समानता साथ हम और हमारी सोच है।
-नीरज कुमार अग्रवाल